सूखी लू से भी ज्यादा खतरनाक है जून की चिपचिपी गर्मी!
जानिए बिना बारिश की इस उमस का पूरा मेडिकल साइंस
जून का महीना आधे से ज्यादा प्रयागराज और उत्तर प्रदेश के लिए एक अजीब सा धोखा लेकर आया है। पंचांग के अनुसार 2 जून को नौतपा का समापन हो चुका है, जिसके बाद आसमान में बादलों की आवाजाही और आंधी का दौर तो शुरू हुआ, लेकिन बादलों ने शहर के सारे इलाकों को एक समान नहीं भिगोया। खण्ड-खण्ड में हुई इस नाममात्र की बारिश ने तापमान को तो कम नहीं किया, बल्कि हवा में नमी का स्तर इतना बढ़ा दिया कि सूखी लू अब ‘चिपचिपी और दम घोंटू गर्मी’ में तब्दील हो चुकी है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब धूप का तीखापन कम है, तो खतरा भी कम होगा। लेकिन मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि जून की चिपचिपी गर्मी और सेहत का संबंध बेहद नाजुक है। मेडिकल साइंस के नजरिए से, यह बिना बारिश वाली उमस भरी गर्मी (Humid Heat) मई की सूखी लू (Dry Heat) से कहीं ज्यादा संक्रामक और थका देने वाली होती है। आइए इसके पीछे छिपे जैविक खतरों को गहराई से समझते हैं।
उमस का जैविक गणित: शरीर क्यों महसूस करता है दोगुनी बेचैनी? (The Scientific Breakdown)
हमारा शरीर 46°C की सूखी गर्मी को तो बर्दाश्त कर लेता है, लेकिन 40°C तापमान के साथ 75% की उमस शरीर का संतुलन बिगाड़ देती है। इसके पीछे मुख्य रूप से 3 मेडिकल कारण काम करते हैं:
‘इवेपोरेटिव कूलिंग’ का ठप होना (The Sweat Trapped State)
हमारा शरीर अंदरूनी अंगों को सुरक्षित रखने के लिए पसीना बाहर निकालता है, और जब वह पसीना हवा में उड़ता है (Evaporate होता है), तो त्वचा को ठंडक मिलती है। लेकिन जून की इस उमस भरी हवा में पहले से ही पानी की मात्रा (Water Vapor) इतनी ज्यादा है कि हमारा पसीना हवा में उड़ ही नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि पसीना शरीर पर ही चिपका रहता है और शरीर का आंतरिक तापमान (Core Body Temperature) अंदर ही लॉक होकर उबलने लगता है।
दिल और फेफड़ों पर दोहरा दबाव (Cardiovascular Strain)
चूंकि शरीर खुद को पसीने के जरिए ठंडा नहीं कर पा रहा है, इसलिए वह अंदरूनी गर्मी को बाहर निकालने के लिए त्वचा की ओर ब्लड सर्कुलेशन को बहुत तेज कर देता है। इस प्रक्रिया में दिल को सामान्य से दोगुनी रफ्तार से धड़कना पड़ता है। यही कारण है कि इस चिपचिपी गर्मी में लोगों को छाती में भारीपन, सांस फूलना और अत्यधिक बेचैनी महसूस होती है।
‘साइलेंट डिहाइड्रेशन’ का जाल (Silent Mineral Depletion)
सूखी गर्मी में जब पसीना सूखता है, तो हमें प्यास का अहसास तुरंत होता है। लेकिन इस चिपचिपी गर्मी में लगातार बहता पसीना हमें थका देता है, और शरीर से सोडियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स चुपके से बह जाते हैं। इसके कारण व्यक्ति बिना धूप में गए भी घर के अंदर बैठे-बैठे अचानक लो बीपी (Low BP) और गंभीर कमजोरी का शिकार हो जाता है।
मंथन हॉस्पिटल की विशेष क्लिनिकल रिपोर्ट – इन 3 खतरों से रहें सावधान
डॉ. अभिषेक द्विवेदी ने बताया कि नौतपा के बाद इस बिना बारिश वाले उमस के दौर में अस्पताल की ओपीडी में 3 विशेष प्रकार के मरीजों की तादाद अचानक बढ़ी है:
- गैस्ट्रिक और फूड फर्मेंटेशन: हवा में नमी बैक्टीरिया के लिए ‘अमृत’ है। इस मौसम में रसोई में रखा हुआ भोजन मात्र 2 से 3 घंटे में बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाता है। इसे खाने से डायरिया, फूड पॉइजनिंग और पेट में ऐंठन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
- चिपचिपा हीटस्ट्रोक (Humid Heatstroke): सूखी धूप न होने के बावजूद, बंद कमरों या हवा रहित जगहों पर काम करने वाले लोग अचानक बेहोश हो रहे हैं। यह उमस के कारण होने वाला हीटस्ट्रोक है।
- त्वचा के जिद्दी फंगल इन्फेक्शन: लगातार पसीना त्वचा की परतों में जमा रहने से दाद (Ringworm) और बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Intertrigo) का प्रकोप घर-घर में फैल रहा है।
डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की प्रीमियम सलाह:
“जून की इस चिपचिपी गर्मी को हल्के में लेने की भूल बिल्कुल न करें। जब हवा में नमी ज्यादा हो, तो पंखा भी गर्म और भारी हवा फेंकने लगता है। इस मौसम में केवल पानी पीना काफी नहीं है, बल्कि शरीर के सॉल्ट बैलेंस (नमक का संतुलन) को बनाए रखना जिंदा रहने के लिए जरूरी है। मंथन हॉस्पिटल, प्रयागराज इस मौसम से होने वाली सभी इमरजेंसी स्थितियों के लिए 24/7 तैयार है।”
इस उमस भरे चक्रव्यूह से बचने के 4 अचूक डॉक्टर उपाय:
- इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय का कड़ा नियम: सादे पानी के बजाय पानी में नींबू, एक चुटकी नमक और थोड़ी मिश्री या चीनी मिलाकर पिएं। घरेलू मट्ठा या पुदीने का पानी इस मौसम में पेट और नसों के लिए सबसे बेहतरीन सुरक्षा कवच है।
- क्रॉस-वेंटिलेशन (हवा का बहाव) सुनिश्चित करें: यदि कमरे में एसी नहीं है, तो कमरे को पूरी तरह बंद न रखें। कूलर या पंखे के साथ खिड़की-दरवाजे थोड़े खुले रखें ताकि हवा आर-पार हो सके और उमस कमरे के अंदर लॉक न हो।
- भोजन का कड़ा प्रोटोकॉल: केवल ताजा बना हुआ खाना ही खाएं। फ्रिज से निकली हुई चीजों को कम से कम 10 मिनट तक अच्छी तरह गर्म करने के बाद ही उपभोग में लाएं। कच्चा या खुला हुआ भोजन इस मौसम में जहर के समान है।
- त्वचा की विशेष स्वच्छता: दिन में कम से कम दो बार सूती तौलिये से बदन को अच्छी तरह सुखाएं। सूती और ढीले वस्त्र पहनें ताकि हवा शरीर तक पहुंच सके।


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