नौतपा खत्म, फिर भी क्यों तप रहा है प्रयागराज? बिना बारिश की यह उमस भरी गर्मी है सबसे ज्यादा जानलेवा

हिंदू पंचांग के अनुसार 2 जून को ही नौतपा समाप्त हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश और प्रयागराज के कई इलाकों में तपिश और बेचैनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कल रात शहर के कुछ हिस्सों में बादलों की गड़गड़ाहट और कड़कती बिजली के साथ तेज हवाएं तो चलीं, लेकिन कई इलाके ऐसे रहे जहाँ पानी की एक बूंद भी नहीं गिरी। नतीजा यह हुआ कि नौतपा के बाद उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

लोग परेशान हैं कि जब नौतपा खत्म हो गया और आसमान में बादल भी आए, तो फिर बारिश क्यों नहीं हुई और यह गर्मी इतनी असहनीय क्यों हो गई है? मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि बिना बारिश की यह सूखी आंधी और उसके बाद बढ़ी उमस (Humidity) सेहत के नजरिए से सामान्य लू (Heatwave) से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है। आइए जानते हैं इसके पीछे का मेडिकल साइंस।

बादल आए, हवा चली, पर पानी क्यों नहीं बरसा? (The Weather Phenomenon)

डॉ. अभिषेक द्विवेदी के अनुसार, जून के पहले और दूसरे हफ्ते में जब समुद्र से आने वाली थोड़ी बहुत नमी (Moisture) उत्तर भारत की अत्यधिक गर्म हवाओं से टकराती है, तो स्थानीय स्तर पर ‘थंडरस्टॉर्म’ (लोकल आंधी-बादल) बनते हैं। ये बादल बहुत सीमित दायरे में बरसते हैं। यही कारण है कि प्रयागराज के एक हिस्से में सड़क पानी से सराबोर हो जाती है और दूसरे हिस्से में धूल उड़ती रहती है।

बिना बारिश की यह उमस ‘नॉर्मल लू’ से ज्यादा खतरनाक क्यों है?

जब तापमान 46°C होता है और हवा सूखी होती है, तो हमारे शरीर का पसीना तुरंत हवा में उड़ जाता है, जिससे शरीर अंदर से ठंडा रहता है। लेकिन जब आंधी-बादल के बाद हवा में नमी (उमस) बढ़ जाती है और पानी नहीं बरसता, तो शरीर के अंदर यह 3 कड़े दुष्प्रभाव होते हैं:

पसीने का न सूखना (Sweat Evaporation Failure):

हवा में पहले से ही इतनी नमी होती है कि हमारे शरीर का पसीना सूख ही नहीं पाता। जब पसीना नहीं सूखेगा, तो शरीर का अंदरूनी तापमान बाहर नहीं निकल पाएगा। इसके कारण इंसान को भयंकर घबराहट, छाती में जकड़न और दम घुटने जैसा अहसास होने लगता है।

अचानक बीपी लो होना और बेहोशी (Silent Heat Exhaustion):

इस चिपचिपी गर्मी में शरीर से लगातार पानी और नमक निकलता रहता है, लेकिन हमें महसूस नहीं होता क्योंकि हवा सूखी नहीं होती। इससे अचानक ब्लड प्रेशर (BP) क्रैश कर जाता है और व्यक्ति बैठे-बैठे चक्कर खाकर गिर सकता है।

बैक्टीरियल और स्किन इन्फेक्शन का विस्फोट:

जिन इलाकों में पानी नहीं बरसा और सिर्फ उमस बढ़ी है, वहां हवा में फंगल स्पोर्स बहुत सक्रिय हो जाते हैं। अगले 48 घंटों में घमौरियां, त्वचा पर लाल चकत्ते (Heat Rash) और फंगल इन्फेक्शन के मरीज सबसे ज्यादा अस्पतालों में रिपोर्ट होते हैं।

डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की हाई-वैल्यू अलर्ट:

“नौतपा खत्म होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि खतरा टल गया है। बिना बारिश वाली यह उमस भरी गर्मी इंसानी शरीर को सबसे ज्यादा थकाती है। मंथन हॉस्पिटल की इमरजेंसी में इस समय घबराहट और अचानक बीपी लो होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिन इलाकों में कल पानी नहीं बरसा, वहां के लोग अगले 3 दिन विशेष सावधानी बरतें।”

इस चिपचिपी गर्मी से बचने के डॉक्टर के अचूक उपाय:

  • पंखे के नीचे सीधे बैठने से बचें: जब बदन पसीने से लथपथ हो, तो तुरंत तेज कूलर या एसी के सामने न जाएं। पहले पसीने को सूती कपड़े से सुखाएं, उसके बाद ही ठंडी हवा में बैठें।
  • नमक-चीनी का पानी सबसे जरूरी: चूंकि पसीना सूख नहीं रहा है, शरीर से सोडियम तेजी से निकल रहा है। दिन में कम से कम दो बार नींबू-नमक-चीनी का पानी या ताजा मट्ठा जरूर पिएं।
  • हल्के कपड़े पहनें: इन दिनों सिंथेटिक या नायलॉन के कपड़े बिल्कुल न पहनें। केवल ढीले और हल्के रंग के सूती (Cotton) कपड़े ही पहनें ताकि त्वचा को सांस लेने का मौका मिले।

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