अचानक बदला मौसम का मिजाज: नौतपा के बीच झमाझम बारिश राहत है या बीमारियों का बुलावा? जानिए डॉक्टर की सलाह

उत्तर प्रदेश और विशेषकर प्रयागराज के नागरिकों के लिए कल की रात बेहद नाटकीय रही। हफ्तों से रिकॉर्ड तोड़ 46°C की झुलसाने वाली गर्मी झेल रहे शहर को कल रात लगभग 11:30 बजे से अचानक आई तेज आंधी, बादलों की गड़गड़ाहट, कड़कती बिजली और घंटों हुई भारी बारिश ने सराबोर कर दिया। सुबह सोकर उठे लोगों को तापमान में भारी गिरावट महसूस हुई और भीषण लू से बड़ी राहत मिली।

लेकिन क्या अचानक बदला मौसम का मिजाज हमारी सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित है? मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के ठीक बाद अचानक हुई यह बारिश पर्यावरण को तो ठंडा करती है, लेकिन मानव शरीर के इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पर इसका बहुत गहरा और कभी-कभी बुरा असर पड़ता है। इस बदलते मौसम में जरा सी भी लापरवाही आपको सीधे अस्पताल पहुंचा सकती है।

मौसम बदलने का शरीर पर अच्छा असर (The Good News):

हीटस्ट्रोक (लू) के मामलों में कमी: तापमान में अचानक 8 से 10 डिग्री की गिरावट आने से जो लोग सीधे हीटस्ट्रोक और थर्मल शॉक की कगार पर थे, उनके शरीर को रिकवर होने का मौका मिल गया है।

सांस के मरीजों को बड़ी राहत: हफ्तों से चल रही धूलभरी गर्म हवाओं (धूल के कणों) के कारण अस्थमा और सांस के मरीजों का दम घुट रहा था। बारिश ने हवा में मौजूद इन हानिकारक कणों को जमीन पर बैठा दिया है, जिससे हवा साफ हुई है।

लेकिन सावधान! इस मौसम परिवर्तन के 3 बड़े बुरे असर (The Hidden Danger):

डॉ. अभिषेक द्विवेदी के अनुसार, भयंकर तपन के बाद जब अचानक पानी बरसता है, तो जमीन से उठने वाली भाप हवा में उमस (Humidity) को चरम पर पहुंचा देती है। यह स्थिति हमारे शरीर के लिए निम्नलिखित खतरे पैदा करती है:

1. ‘थर्मल शॉक’ और वायरल इन्फेक्शन (Flu & Viral Fever): कल दोपहर तक हम 46°C के वातावरण में थे और रात को अचानक तापमान गिरकर 28°C-30°C पर आ गया। शरीर के लिए इस 15-16 डिग्री के अचानक आए अंतर को झेलना आसान नहीं होता। इसके कारण शरीर की इम्युनिटी अचानक डाउन होती है, जिससे गले में इन्फेक्शन, तेज बुखार, खांसी और सर्दी-जुकाम (Viral Flu) के वायरस तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। घर-घर में लोग बीमार पड़ने लगते हैं।

2. फूड पॉइजनिंग और पेट के रोग (Gastroenteritis Risk): बारिश के बाद बढ़ी हुई उमस और नमी के कारण हवा में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं। इस मौसम में दूध का फटना, खाने का सड़ना और पानी का दूषित होना बहुत आम हो जाता है। इसके कारण अगले 3-4 दिनों में अस्पतालों में डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और गैस्ट्रो की समस्या वाले मरीज अचानक बढ़ जाते हैं।

3. मच्छरों का पनपना और जलभराव: कल रात की भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में पानी जमा हो गया है। गर्मी के तुरंत बाद जमा हुआ यह साफ पानी डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के पनपने के लिए सबसे मुफीद जगह है।

डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की वैज्ञानिक सलाह:

“मौसम का यह बदलाव बेशक सुहाना लग रहा है, लेकिन मेडिकल साइंस के नजरिए से यह सबसे ज्यादा बीमार करने वाला समय है। इस समय ‘ठंडा-गर्म’ होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। पंखे और कूलर की स्पीड को मौसम के अनुसार संतुलित रखें और खान-पान में बेहद सावधानी बरतें। मंथन हॉस्पिटल की टीम इस बदलते मौसम में हर प्रकार की ओपीडी सेवा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।”

बदलते मौसम में सुरक्षित रहने के लिए डॉक्टर की गाइड:

  • उबला या फिल्टर पानी ही पिएं: बारिश के तुरंत बाद जलभराव के कारण पीने का पानी दूषित होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। पानी को हमेशा सुरक्षित स्रोत से ही लें।
  • बासी भोजन को कहें पूरी तरह ‘ना’: उमस वाले इस मौसम में भोजन बनने के 2 घंटे के भीतर ही उपभोग कर लें। बाहर का खुला या कटी हुई चीजें बिल्कुल न खाएं।
  • एसी और कूलर का सही इस्तेमाल: रात में मौसम ठंडा होने पर एसी को बहुत कम तापमान पर न चलाएं। यदि ठंडक महसूस हो, तो कूलर या एसी बंद कर दें, क्योंकि यही लापरवाही सुबह आपको बदन दर्द और बुखार का तोहफा दे सकती है।