उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बांदा में इस समय आसमान से आग के गोले बरस रहे हैं। पारा 46 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। ऐसे भीषण मौसम में सबसे आम शब्द जो हम सुनते हैं, वह है ‘डिहाइड्रेशन’ यानी शरीर में पानी की कमी होना। लोग सोचते हैं कि पानी कम पिया है, तो दो गिलास पानी पीने से सब ठीक हो जाएगा।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जानलेवा गर्मी में Dehydration ka asli nuksaan kya hai? मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि डिहाइड्रेशन सिर्फ प्यास लगना नहीं है; यह एक ऐसी खतरनाक स्थिति है जो चुपके से आपके शरीर के सबसे मुख्य अंगों को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती है।
1. किडनी का अचानक फेल होना (Acute Kidney Injury)
डॉ. अभिषेक द्विवेदी के अनुसार, डिहाइड्रेशन का सबसे पहला और घातक असर हमारी किडनी पर पड़ता है। जब शरीर में पानी की भारी कमी होती है, तो खून गाढ़ा हो जाता है और किडनी तक खून का बहाव बहुत कम हो जाता है। इसके कारण किडनी शरीर के टॉक्सिंस (जहरीले पदार्थों) को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे अचानक ‘क्रिएटिनिन’ बढ़ जाता है और किडनी काम करना बंद कर सकती है। अगर लंबे समय तक पेशाब न आए, तो यह बेहद खतरनाक संकेत है।
2. खून का गाढ़ा होना और हार्ट अटैक का खतरा
जब शरीर से पसीने के रूप में पानी उड़ जाता है, तो नसों में बहने वाले खून का वॉल्यूम कम हो जाता है। गाढ़े खून को पूरे शरीर में पहुंचाने के लिए दिल को बहुत तेजी से धड़कना पड़ता है। इससे ब्लड प्रेशर अचानक लो हो जाता है या बहुत ज्यादा फ्लक्चुएट करता है, जिससे हार्ट फेलियर या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
3. दिमाग में सूजन और ‘ब्रेन फॉग’ (Neurological Damage)
हमारे दिमाग का लगभग 75% हिस्सा पानी से बना है। गंभीर डिहाइड्रेशन के कारण दिमाग की कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। यही कारण है कि लू की चपेट में आए मरीज का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है, वह अजीब बातें करने लगता है, उसे भ्रम (Confusion) होता है और अंत में वह बेहोश होकर कोमा में जा सकता है।
4. शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स का पूरी तरह खत्म होना
पसीने के रास्ते शरीर का सारा सोडियम और पोटेशियम बाहर निकल जाता है। इन मिनरल्स के बिना हमारी नसें और मांसपेशियां काम नहीं कर सकतीं। इसकी वजह से अचानक पूरे शरीर में तेज ऐंठन, कमजोरी और पैरालिसिस जैसा अहसास होने लगता है।
डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की सलाह
“मंथन हॉस्पिटल में इस समय जितने भी मरीज गंभीर हालत में आ रहे हैं, उनकी सबसे बड़ी वजह साइलेंट डिहाइड्रेशन है। लोग प्यास लगने का इंतजार करते हैं, जो कि बहुत बड़ी गलती है। जब आपको प्यास महसूस होती है, तब तक आपका शरीर पहले ही 2% पानी खो चुका होता है। प्रयागराज की इस गर्मी में पानी कम होना सीधे मौत को दावत देने जैसा है।”
बचाव के लिए डॉक्टर की अचूक सलाह:
- पेशाब के रंग पर रखें नजर: अगर पेशाब का रंग गहरा पीला या संतरी है, तो तुरंत समझ जाएं कि शरीर में पानी की भयंकर कमी है।
- हर एक घंटे में पिएं इलेक्ट्रोलाइट: सादे पानी के बजाय पानी में ओआरएस (ORS), नींबू-नमक, या ग्लूकोज मिलाकर पीते रहें।
- मट्ठा और सत्तू का सेवन: उत्तर प्रदेश का पारंपरिक सत्तू का शरबत और मट्ठा इस मौसम में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को बनाए रखने का सबसे बेस्ट इलाज है।


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