उत्तर प्रदेश का प्रयागराज इस समय भीषणतम गर्मी की चपेट में है। जब पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर 46.4°C तक पहुंच जाता है, तो यह केवल मौसम का रिकॉर्ड नहीं टूटता, बल्कि हमारे शरीर के अंदर एक गंभीर जैविक युद्ध (Biological War) शुरू हो जाता है।
क्या आप जानते हैं कि 45°C ke upar sharir me kya hota hai? इस अत्यधिक तापमान का हमारे अंगों पर क्या असर पड़ता है? मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी ने इसके पीछे के विज्ञान और मेडिकल इमरजेंसी को विस्तार से समझाया है, जिसे हर नागरिक को जानना बेहद जरूरी है।
तापमान 45°C पार होने पर शरीर के अंदर का विज्ञान:
हमारे शरीर का सामान्य आंतरिक तापमान 37°C (98.6°F) होता है। हमारा दिमाग (Hypothalamus) इसे हर हाल में मेंटेन रखता है। लेकिन जब बाहर का तापमान 45°C से ऊपर चला जाता है, तो शरीर के अंदर निम्नलिखित खतरनाक बदलाव होने लगते हैं:
- नेचुरल कूलिंग सिस्टम का फेल होना (Sweat Evaporation Stops):
शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए तेजी से पसीना बाहर निकालता है। लेकिन जब बाहर भयंकर गर्म हवा (लू) चल रही हो, तो पसीना उड़ने से पहले ही सूख जाता है या अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण पसीना आना ही बंद हो जाता है। इससे शरीर का अंदरूनी तापमान अचानक 104°F या उससे ऊपर भागने लगता है। - खून का गाढ़ा होना और दिल पर दबाव (Blood Thickening):
पानी की कमी से शरीर का ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है। गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए दिल को बहुत तेजी से धड़कना पड़ता है। यही कारण है कि हाई बीपी और दिल के मरीजों के लिए यह तापमान जानलेवा हो जाता है। - कोशिकाओं का टूटना (Cellular Damage):
मेडिकल साइंस के अनुसार, 42°C से ऊपर का तापमान मानव शरीर के प्रोटीन्स को ‘डीनेचर’ (पिघलाना या डैमेज करना) शुरू कर देता है। कोशिकाएं (Cells) अंदरूनी तौर पर प्रभावित होने लगती हैं, जिससे अंगों को ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है। - ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर असर (Neurological Impact):
जैसे ही अत्यधिक गर्मी का असर दिमाग तक पहुंचता है, व्यक्ति का खुद पर कंट्रोल खोने लगता है। चक्कर आना, भ्रम (Confusion) होना, और गंभीर स्थिति में न्यूरोलॉजिकल शॉक के कारण व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की वैज्ञानिक सलाह:
“जब बाहर पारा 45°C के ऊपर हो, तो शरीर को ठंडा रखना कोई चॉइस नहीं बल्कि जिंदा रहने के लिए जरूरी है। इस तापमान में बिना ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट या ओआरएस (ORS) वाले पानी के बाहर कदम भी न रखें। शरीर को जबरदस्ती इस हीट के सामने पुश न करें।”


Leave a Reply