उत्तर प्रदेश में नौतपा की शुरुआत से पहले ही सूर्य का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। प्रयागराज और बांदा सहित पूरा इलाका इस समय भयंकर ‘रेड अलर्ट’ (Red Alert) की स्थिति में है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी वॉर्ड इस समय फुल नजर आ रहे हैं। हर तरफ एक ही सवाल है कि आखिर इस बार Hospital me garmi ke patients kyun badh rahe? ऐसा क्या बदल गया है जो लोग इतनी तेजी से बीमार पड़ रहे हैं?
इस गंभीर स्थिति पर मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी ने एक बेहद चौंकाने वाली और जरूरी मेडिकल रिपोर्ट साझा की है, जिसे जानकर आप अपने परिवार को हॉस्पिटल पहुंचने से बचा सकते हैं।
अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ आने के 3 मुख्य कारण (Doctor Analysis):
- ‘कम्युलेटिव हीट स्ट्रेस’ (Cumulative Heat Stress): डॉ. अभिषेक द्विवेदी के अनुसार, जब तापमान लगातार कई दिनों तक 45°C से ऊपर बना रहता है, तो हवाएं रात में भी ठंडी नहीं होतीं। इंसान का शरीर लगातार कई दिनों तक इस हीट को झेलते-झेलते अंदरूनी तौर पर थक जाता है। सातवें या आठवें दिन शरीर का इम्यून सिस्टम अचानक हार मान जाता है और व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल पहुंच जाता है।
- गलत खान-पान और फूड पॉइजनिंग (Dietary Mistakes): इस भीषण गर्मी में खाना बहुत जल्दी खराब (Ferment) हो जाता है। लोग अनजाने में बासी खाना, धूप में कटी हुई सब्जियां या बाजार के खुले कटे हुए फल और गंदा पानी पी लेते हैं। इसके कारण गर्मी में डायरिया, उल्टी और पेट में गंभीर इन्फेक्शन (Gastroenteritis) के मरीज सबसे ज्यादा अस्पताल पहुंच रहे हैं।
- क्रॉनिक मरीजों का रिस्क जोन में आना (Danger for High BP & Sugar): जो लोग पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, इस 46°C के तापमान में उनका शरीर ब्लड प्रेशर को मेंटेन नहीं कर पा रहा है। खून गाढ़ा होने से अचानक घबराहट या ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।
डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की चेतावनी:
“मंथन हॉस्पिटल के इमरजेंसी में आ रहे 70% मरीजों में एक बात कॉमन देखी जा रही है—लापरवाही। लोग धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी पी रहे हैं, या बिना सिर ढके प्रयागराज की दोपहर में घूम रहे हैं। यह सिर्फ गर्मी नहीं है, यह शरीर के अंगों को अंदर से सुखा देने वाली स्थिति है। अगर समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति सीधे वेंटिलेटर तक पहुंचा सकती है।”


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