उत्तर प्रदेश का प्रयागराज इस समय नौतपा की भीषण आग में तप रहा है। जब आसमान से बरसती धूप और गर्म लू के थपेड़े स्वस्थ लोगों को बीमार कर रहे हैं, तो डायबिटीज (Sugar) के मरीजों के लिए चुनौती दोगुनी हो जाती है। अक्सर लोग पूछते हैं कि Diabeteswale garmi me kya dhyaan rakhein? क्या वाकई कड़कती धूप का असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है?
मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि भीषण गर्मी और डायबिटीज का सीधा और बेहद संवेदनशील संबंध है। इस मौसम में जरा सी भी लापरवाही शुगर के मरीजों को सीधे आईसीयू (ICU) या इमरजेंसी वॉर्ड पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं इसके पीछे का मेडिकल विज्ञान और बचाव के अचूक उपाय।
भीषण गर्मी कैसे बिगाड़ती है डायबिटीज का संतुलन? (The Biological Impact):
डॉ. अभिषेक द्विवेदी के अनुसार, 45°C से अधिक तापमान होने पर डायबिटीज के मरीजों के शरीर में मुख्य रूप से ये 3 बड़े बदलाव होते हैं:
इंसुलिन का अवशोषण बदलना (Insulin Absorption Rates):
जब बाहर भयंकर गर्मी होती है, तो हमारा शरीर खुद को ठंडा करने के लिए त्वचा की नसों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा देता है। अगर मरीज इंसुलिन का इंजेक्शन लेता है, तो इस बढ़े हुए ब्लड फ्लो के कारण इंसुलिन शरीर में बहुत तेजी से एब्जॉर्ब (सोखना) होता है। इसके कारण अचानक हाइपोग्लाइसीमिया (Sugar अचानक बहुत कम होना) का खतरा बढ़ जाता है, जो कि जानलेवा हो सकता है।
तेजी से डिहाइड्रेशन और हाई शुगर (Dehydration Trap):
पसीने के रूप में पानी बह जाने से शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है। जब खून में पानी कम होता है, तो खून गाढ़ा हो जाता है और उसमें मौजूद ग्लूकोज की एकाग्रता (Concentration) बढ़ जाती है। नतीजा? आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत हाई बताने लगता है।
पसीना कम आना और हीटस्ट्रोक का रिस्क:
लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की नसें (Nerves) कमजोर हो जाती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ कहते हैं। इसकी वजह से उनके पसीने की ग्रंथियां ठीक से काम नहीं करतीं और शरीर को खुद ठंडा करने में दिक्कत होती है। ऐसे मरीजों को लू (Heatstroke) बहुत जल्दी लगती है।
शुगर के मरीज नौतपा में क्या सावधानी बरतें? (Doctor’s Checklist):
1. ओआरएस (ORS) और ग्लूकोज के घोल से दूरी बनाएं: आम लोगों को धूप से आने पर ओआरएस या ग्लूकोज पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन डायबिटीज के मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के ओआरएस या मीठे पेय बिल्कुल न लें। पानी की कमी पूरी करने के लिए सादा पानी, नींबू-नमक का पानी, फीकी छाछ या बिना चीनी का पुदीना पानी सबसे सुरक्षित है।
2. इंसुलिन और दवाइयों को तपन से बचाएं: क्या आप जानते हैं कि 30°C से ऊपर का तापमान इंसुलिन को पूरी तरह खराब (Inactivate) कर देता है? नौतपा में घरों के अंदर का तापमान भी 35°C पार कर रहा है। इसलिए अपनी इंसुलिन शीशियां, पेन और शुगर नापने की स्ट्रिप्स को फ्रिज के निचले हिस्से में रखें (फ्रीजर में नहीं)। धूप में सफर करते समय इंसुलिन को आइस-पैक के साथ ही ले जाएं।
3. नंगे पैर चलने की भूल कभी न करें: गर्मी में घरों के फर्श या चप्पलें बहुत गर्म हो जाती हैं। डायबिटिक मरीजों के पैरों के घाव बहुत मुश्किल से सूखते हैं। इसलिए घर के अंदर भी सूती मोज़े और आरामदायक चप्पलें पहनकर रखें ताकि पैरों में ‘थर्मल बर्न’ या छाले न पड़ें।
4. शुगर टेस्टिंग की फ्रीक्वेंसी बढ़ाएं: इस मौसम में शुगर का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होता है। इसलिए हफ्ते में एक बार के बजाय, इन 9 दिनों में हर दूसरे दिन या डॉक्टर के परामर्श अनुसार अपनी शुगर की जांच घर पर ग्लूकोमीटर से जरूर करें।
डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की वैज्ञानिक सलाह:
“नौतपा की इस लहर में डायबिटीज के मरीजों को अपनी सेहत के साथ जरा भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आपको अचानक अत्यधिक पसीना आए, घबराहट हो, कंपकंपी छूटे या चक्कर आए, तो यह शुगर लो होने का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में तुरंत अपनी जांच करें और मंथन हॉस्पिटल, प्रयागराज के इमरजेंसी नंबर पर संपर्क करें।”


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