आज से नौतपा शुरू: आसमान से बरसेगी आग, डॉ. अभिषेक द्विवेदी ने जारी की गंभीर चेतावनी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, बांदा और आसपास के जिलों में पहले से ही सूरज का सितम चरम पर है। इसी बीच आज यानी 25 मई से आज से नौतपा शुरू हो गया है। सनातन परंपरा और मौसम विज्ञान के अनुसार, आने वाले 9 दिन (25 मई से 2 जून तक) साल के सबसे भीषण और झुलसाने वाले दिन होने जा रहे हैं। इस दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे सूर्य की सीधी किरणें सीधे धरती पर आ रही हैं और पारा 48°C तक पहुंचने की आशंका है।

इस बेहद संवेदनशील और जानलेवा मौसम को देखते हुए मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी ने नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक विशेष स्वास्थ्य चेतावनी और नौतपा के दुष्प्रभावों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।

नौतपा के शरीर पर 4 सबसे खतरनाक दुष्प्रभाव (Medical Consequences):

डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि नौतपा की गर्मी कोई सामान्य गर्मी नहीं होती। इन 9 दिनों में हवा में नमी (Humidity) बिल्कुल शून्य के करीब पहुंच जाती है, जिससे मानव शरीर पर निम्नलिखित गंभीर प्रभाव पड़ते हैं:

अचानक ‘हीट स्ट्रोक’ और थर्मल शॉक (Sudden Heatstroke):

नौतपा के दौरान चलने वाली पछुआ हवाएं (खतरनाक लू) इतनी गर्म होती हैं कि वे शरीर के संपर्क में आते ही त्वचा को झुलसा देती हैं। ऐसे में अगर आप बिना सिर ढके बाहर निकलते हैं, तो शरीर का कूलिंग सिस्टम मिनटों में क्रैश हो जाता है और सीधे हीटस्ट्रोक आ जाता है।

तेजी से खून का गाढ़ा होना (Blood Hyper-viscosity):

इन 9 दिनों की सूखी गर्मी में फेफड़ों और सांस के जरिए भी शरीर का पानी भाप बनकर उड़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘इनसेंसिबल वाटर लॉस’ कहते हैं। पानी की इस तेजी से हुई कमी के कारण खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो जाता है और ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

गंभीर फूड पॉइजनिंग और डायरिया (Gastroenteritis):

नौतपा की भीषण गर्मी के कारण बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। सुबह का बना खाना दोपहर तक खराब हो जाता है। अस्पतालों में इस समय उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़ और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या नौतपा में सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।

स्किन बर्न और हीट रैशेज (Severe Skin Infection):

सूरज की अत्यधिक यूवी (UV) किरणों के कारण त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना, छाले होना या सनबर्न होना बहुत आम हो जाता है।

डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की चेतावनी:

“नौतपा का मतलब है प्रकृति का सबसे उग्र रूप। इन 9 दिनों में मंथन हॉस्पिटल की इमरजेंसी पूरी तरह अलर्ट पर है। प्रयागराज के नागरिकों से मेरी हाथ जोड़कर अपील है कि इन 9 दिनों को हल्के में न लें। यह मौसम बहादुरी दिखाने का नहीं, बल्कि खुद को और अपने बच्चों को घर के अंदर सुरक्षित रखने का है। प्यास न भी लगे, तो भी हर आधे घंटे में पानी या इलेक्ट्रोलाइट पीते रहें।”

नौतपा के 9 दिनों के लिए डॉक्टर की ‘सुरक्षा गाइड’:

दुपंखा और सूती कपड़ा: घर से बाहर निकलना मजबूरी हो तो मोटे सूती कपड़े या गमछे से सिर, चेहरा और दोनों कान अच्छी तरह ढंककर ही निकलें।

कच्चे आम का पना और मट्ठा: इन 9 दिनों में रोजाना सुबह-शाम कच्चे आम का पना, पुदीने का रस, या सत्तू का शरबत जरूर लें। यह शरीर के आंतरिक तापमान को 37°C पर बनाए रखने में मदद करता है।

बासी भोजन से तौबा: इन 9 दिनों में भूलकर भी बासी या खुला हुआ खाना न खाएं। ताजा और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करें।