हीटस्ट्रोक के 5 ख़तरनाक लक्षण – इग्नोर मत करिये

उत्तर प्रदेश में सूर्य का प्रकोप चरम पर है। प्रयागराज और बांदा जैसे जिलों में पारा 46°C से 48°C के बीच झुलसा रहा है, जिससे दोपहर के समय सड़के सुनसान हो जाती हैं। गरम पछुआ हवाएं (लू) सीधे शरीर पर वार कर रही हैं। इस जानलेवा मौसम में मंथन हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिषेक द्विवेदी का कहना है कि अस्पताल के ओपीडी और इमरजेंसी में लू की चपेट में आए मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

अक्सर लोग शुरुआती शारीरिक दिक्कतों को मामूली थकान समझकर छोड़ देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेती है। नीचे दिए गए Heatstroke ke 5 khatarnak lakshan को पहचानें और खुद के साथ अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

ये हैं लू लगने के 5 सबसे गंभीर संकेत (Warning Signs)

अचानक तेज सिरदर्द और चक्कर आना (Dizziness & Headache):

कड़कती धूप में निकलने के बाद अगर अचानक सिर में भारीपन महसूस हो या आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य न मानें। यह दिमाग तक जाने वाले ब्लड सर्कुलेशन पर गर्मी के असर का संकेत है।

पसीना बंद होना और त्वचा का लाल-सूखा होना (High Body Temperature & No Sweat):

यह सबसे खतरनाक मोड़ होता है। जब शरीर का थर्मोस्टेट (कूलिंग सिस्टम) पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, तो शरीर को ठंडा करने के लिए पसीना आना बंद हो जाता है। त्वचा बिल्कुल सूखी, गर्म और लाल दिखाई देने लगती है।

जी मिचलाना या उल्टी होना (Nausea & Vomiting):

अत्यधिक डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और शरीर का तापमान 103°F या 104°F तक पहुंचने पर पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण मरीज को घबराहट, जी मिचलाना या लगातार उल्टियां हो सकती हैं।

धड़कन का अचानक तेज होना (Rapid Pulse Rate):

गर्मी के कारण जब शरीर को ठंडा रखने की कोशिश में दिल को दोगुना काम करना पड़ता है, तो पल्स रेट यानी दिल की धड़कनें बहुत तेज हो जाती हैं। सांस लेने में भी तकलीफ महसूस होने लगती है।

व्यवहार में बदलाव या बेहोशी (Confusion & Fainting):

लू का शिकार होने पर व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है, उसे बात समझने में भ्रम (Confusion) हो सकता है, या वह बोलते-बोलते लड़खड़ा सकता है। स्थिति गंभीर होने पर मरीज अचानक बेहोश होकर गिर सकता है।

डॉ. अभिषेक द्विवेदी (मंथन हॉस्पिटल) की सलाह:

“अगर आपके आस-पास किसी व्यक्ति में इनमें से कोई भी लक्षण दिखें, तो सबसे पहले उसे धूप से हटाकर छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं। गीले कपड़े से पूरा शरीर पोंछें और उसे तुरंत मंथन हॉस्पिटल या नजदीकी चिकित्सा केंद्र लेकर आएं। ऐसे मामलों में हर एक मिनट कीमती होता है।”

प्रयागराज और उत्तर प्रदेश के नागरिकों से अपील है कि दोपहर 12 से 4 के बीच केवल अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही बाहर निकलें। अपने साथ पानी, ओआरएस या नींबू पानी हमेशा रखें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।