— डॉ. अभिषेक द्विवेदी, निदेशक – मंथन हॉस्पिटल
नमस्ते प्रयागराज,
जब कोई डॉक्टर आपको यह कहे कि “मैं चिंतित हूँ” — तो उसका मतलब सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी होती है। पिछले कुछ समय से जब मैं अस्पताल की OPD में बैठता हूँ, तो एक ऐसा बदलाव देख रहा हूँ जो चौंकाने वाला ही नहीं, बल्कि डराने वाला भी है।
आज हार्ट की बीमारी सिर्फ 60–70 वर्ष के बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। 25 से 40 वर्ष के युवा, जो खुद को “फिट”, “बिज़ी” और “नो टाइम फॉर बीमारी” मानते हैं — अब नियमित रूप से हार्ट अटैक के साथ अस्पताल पहुँच रहे हैं।
आँकड़े क्या कहते हैं — और हमें क्या समझना चाहिए? – पिछले 5 वर्षों में भारत में हार्ट अटैक के मामलों में लगभग 50% तक की वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि किसी एक कारण से नहीं, बल्कि हमारे आज के वातावरण (Environment) और जीवनशैली (Lifestyle) के संयुक्त प्रभाव से हो रही है।
❗ हार्ट अटैक कोई “अचानक हुई घटना” नहीं है — यह एक धीमी प्रक्रिया है, जिसकी नींव हम रोज़ अपनी आदतों से रखते हैं।
❌ “मैं तो बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ” — सबसे बड़ा भ्रम मरीज अकसर कहते हैं: “डॉक्टर साहब, कल तक तो सब ठीक था… आज ये कैसे हो गया?” यही दिल की बीमारी की सबसे ख़तरनाक सच्चाई है।
- High BP दर्द नहीं देता।
- High Cholesterol जलन नहीं करता।
- Diabetes हमेशा लक्षण नहीं दिखाती।
ये तीनों मिलकर आपकी धमनियों को चुपचाप अंदर से खोखला करते रहते हैं — जब तक कि एक दिन अचानक रास्ता बंद न हो जाए।
आज के दौर के 5 “मौन दुश्मन” (Silent Killers)
- हाई ब्लड प्रेशर : नसों की दीवारों को कमजोर कर देता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल : धमनियों में ‘गाद’ (Plaque) जमा देता है।
- अनियंत्रित डायबिटीज : रक्त वाहिकाओं को अंदर से ‘जंग’ (Damage) लगाती है।
- धूम्रपान व तंबाकू : नसों को सिकोड़कर खून का थक्का (Clot) बनाता है।
- आधुनिक जीवनशैली : नींद की कमी, घंटों एक जगह बैठकर काम करना और लगातार मानसिक तनाव दिल को समय से पहले थका रहे हैं।
“गैस” समझकर जिन संकेतों को हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं
- सीने में भारीपन, दबाव या निचोड़ने जैसा अहसास।
- दर्द जो बाएँ हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ के ऊपरी हिस्से तक जाए।
- बिना मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना।
खास चेतावनी : अगर सीने की जलन असामान्य लगे, तो उसे सिर्फ एसिडिटी मानकर ‘इनो’ या घरेलू उपाय में समय बर्बाद न करें। यह ‘मौन हार्ट अटैक’ हो सकता है।
याद रखें : ‘गोल्डन ऑवर’ लक्षण दिखने के बाद का पहला 1 घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इसमें मिला इलाज जान बचने की संभावना को 90% तक बढ़ा देता है।
डॉ. द्विवेदी का सुझाव : दिल को “मजबूत” कैसे रखें?
- नियमित जाँच (Screening) : 30 की उम्र के बाद साल में एक बार BP, Sugar और Lipid Profile ज़रूर चेक कराएं।
- 30 मिनट का नियम : तेज़ चलना दवा से बेहतर असर करता है।
- खान-पान : नमक और चीनी की मात्रा कम करें, हृदय-मित्र (Heart-friendly) आहार लें।
अंत में एक सच्ची बात… दिल कोई मशीन नहीं — लेकिन हमने उसे मशीन की तरह बिना ‘सर्विस’ के चलाना सीख लिया है। आपका दिल आपके परिवार के लिए धड़कता है, आपके बच्चों के भविष्य के लिए धड़कता है। इसकी सुरक्षा आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सतर्क रहें। समय पर जाँच कराएँ। स्वस्थ रहें।
- मंथन हॉस्पिटल : अरैल मोड़, नैनी, प्रयागराज
- आपातकालीन संपर्क : 0532-4509975 | 7752801224


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