
नमस्ते! मंथन हॉस्पिटल – मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की ओर से, मैं, डॉ. अभिषेक द्विवेदी, आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। कल, 1 जुलाई को, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस था और इस अवसर पर आप सभी से मिली शुभकामनाओं, प्यार और सम्मान ने मेरे हृदय को कृतज्ञता से भर दिया है। कल के दिन, मंथन हॉस्पिटल के हमारे समस्त स्टाफ ने, मेरी और अन्य डॉक्टरों की उपस्थिति में एक केक काटकर इस विशेष दिन का जश्न मनाया। यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई कि हमारे समर्पण को इतनी आत्मीयता से सराहा गया। आपके इन शुभकामना संदेशों और इस स्नेहिल आयोजन ने हमें, डॉक्टरों को, निस्वार्थ सेवा के अपने पथ पर और अधिक दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। यह दिन न केवल हमारे पेशे का सम्मान करता है, बल्कि यह हमें चिकित्सा के महान उद्देश्य और इसकी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाता है।
एक चिकित्सक के रूप में, मैं जानता हूँ कि यह यात्रा चुनौतियों, सीखने और अथाह संतुष्टि से भरी है। हर मरीज की मुस्कान, हर ठीक हुआ जीवन, और हर परिवार की राहत की साँस ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। आइए, इस विशेष दिन के महत्व को समझें, इसके पीछे की प्रेरणा को जानें, और चिकित्सा सेवा के प्रति अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएँ।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस – क्यों और कैसे?
हर साल 1 जुलाई को भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह दिन चिकित्सा पेशे के प्रति सम्मान व्यक्त करने और समाज में डॉक्टरों के अमूल्य योगदान को पहचानने के लिए समर्पित है। यह सिर्फ एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह उन डॉक्टरों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जो दिन-रात, बिना किसी भेदभाव के, मानव जीवन को बचाने और बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास करते हैं।
इस दिन को क्यों चुना गया? 1 जुलाई की तारीख को एक विशेष कारण से चुना गया है। यह दिन भारत के महानतम चिकित्सकों में से एक, डॉ. बिधान चंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) की जयंती और पुण्यतिथि दोनों को चिह्नित करता है। डॉ. रॉय एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी थे – वे न केवल एक प्रतिष्ठित चिकित्सक थे, बल्कि एक समर्पित स्वतंत्रता सेनानी, एक दूरदर्शी शिक्षाविद् और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में एक कुशल राजनेता भी थे। उनका जीवन चिकित्सा और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

डॉ. बिधान चंद्र रॉय: एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
डॉ. बिधान चंद्र रॉय (1 जुलाई 1882 – 1 जुलाई 1962) का जीवन एक प्रेरणास्त्रोत है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है और अपने समाज के लिए अभूतपूर्व योगदान दे सकता है।
चिकित्सा के प्रति समर्पण: डॉ. रॉय ने अपनी चिकित्सा की पढ़ाई कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से की और फिर उच्च शिक्षा के लिए लंदन चले गए। उन्होंने रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन और रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स, दोनों की सदस्यता एक ही वर्ष (1911) में हासिल की, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि थी। भारत लौटने के बाद, उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दी। वे एक कुशल चिकित्सक थे जिनकी रोगियों के प्रति गहरी सहानुभूति थी। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे हर मरीज को केवल एक केस नहीं, बल्कि एक इंसान समझते थे, जिसकी अपनी चिंताएं और उम्मीदें थीं। उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, कैंपबेल मेडिकल स्कूल और कारमाइकल मेडिकल कॉलेज सहित कई मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाया भी।
राजनेता और दूरदर्शी नेता: डॉ. रॉय का योगदान केवल चिकित्सा तक ही सीमित नहीं था। वे महात्मा गांधी से गहराई से प्रभावित थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हुए। स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने 1948 से अपनी मृत्यु (1962) तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल ने स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की। उन्होंने दुर्गापुर, कल्याणी, बिधाननगर और अशोकनगर जैसे कई नए शहरों की स्थापना की। वे चाहते थे कि हर नागरिक को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिले।
डॉ. रॉय की विरासत: डॉ. रॉय को 1961 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनका जीवन डॉक्टरों के लिए एक आदर्श है – न केवल उत्कृष्ट चिकित्सक बनने का, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें पूरा करने का। उन्होंने यह दिखाया कि एक डॉक्टर केवल दवाओं और उपचार तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज का एक स्तंभ हो सकता है जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चिकित्सक दिवस का महत्व – क्यों यह हमारे लिए मायने रखता है?
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल एक औपचारिक स्मरणोत्सव नहीं है; इसका गहरा महत्व है:
स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना: यह हमें उन स्वास्थ्य चुनौतियों की याद दिलाता है जिनका हम सामना कर रहे हैं, और डॉक्टरों को इन चुनौतियों से लड़ने और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
मान्यता और सम्मान: यह उन डॉक्टरों के अथक प्रयासों, बलिदानों और समर्पण को मान्यता देता है जो अपनी नींद, आराम और व्यक्तिगत जीवन का त्याग करके दूसरों की सेवा करते हैं।
प्रेरणा और प्रोत्साहन: यह युवा पीढ़ी को चिकित्सा पेशे में प्रवेश करने के लिए प्रेरित करता है, जो सेवा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से मानव जाति के लिए एक महान योगदान दे सकते हैं।
जागरूकता बढ़ाना: यह आम जनता को डॉक्टरों की भूमिका और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में उनके महत्व के बारे में शिक्षित करता है।
डॉक्टर-रोगी संबंध को मजबूत करना: यह दिन रोगियों और समुदायों को डॉक्टरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे विश्वास और सम्मान का एक मजबूत रिश्ता बनता है।
चिकित्सा नैतिकता और मूल्यों को दोहराना: यह डॉक्टरों को चिकित्सा पेशे के मूल मूल्यों – करुणा, नैतिकता, अखंडता और रोगी-केंद्रित देखभाल – को याद दिलाता है।

एक डॉक्टर के रूप में मेरे अनुभव और भावनाएँ
चिकित्सक दिवस पर आप सभी से मिली शुभकामनाओं और मंथन हॉस्पिटल स्टाफ द्वारा आयोजित केक काटने के इस प्यारे पल ने मुझे अपने पिछले वर्षों की सेवा और अनुभवों को याद दिलाया है। मंथन हॉस्पिटल में डॉ. अभिषेक द्विवेदी के रूप में, मैंने देखा है कि कैसे एक डॉक्टर का काम सिर्फ बीमारियों का इलाज करना नहीं है, बल्कि उम्मीद जगाना, दर्द कम करना और जीवन को गरिमा देना है।
मुझे याद है, कुछ महीने पहले एक युवा मरीज हमारे पास आया था, जिसे गंभीर रूप से एनीमिया था। वह बेहद थका हुआ और कमजोर था, उसके परिवार वाले चिंतित थे। हमारी टीम ने मिलकर उसका निदान किया, उचित उपचार योजना बनाई, और उसे व्यक्तिगत देखभाल प्रदान की। कुछ हफ्तों के बाद, जब वह ठीक होकर डिस्चार्ज हुआ और उसके चेहरे पर एक स्वस्थ चमक थी, तो उसकी और उसके परिवार की आँखों में मैंने जो खुशी देखी, वह किसी भी पुरस्कार से बढ़कर थी। ऐसे क्षण ही हमें आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।
एक डॉक्टर के रूप में, मैं हर दिन मानवीय लचीलेपन और चिकित्सा विज्ञान की शक्ति का गवाह बनता हूँ। मैं जानता हूँ कि यह एक कठिन पेशा है – लंबे घंटे, भावनात्मक दबाव, और कभी-कभी निराशा भी होती है। लेकिन हर बार जब कोई मरीज ठीक होकर मुस्कुराता है, जब कोई परिवार राहत की साँस लेता है, तो सारी कठिनाइयां छोटी लगने लगती हैं। यह पेशा हमें लोगों के जीवन को छूने, उनमें सकारात्मक बदलाव लाने का अद्वितीय अवसर देता है।
चिकित्सक दिवस की गतिविधियाँ और भविष्य की आशाएँ
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर, मंथन हॉस्पिटल में हमने मिलकर जश्न मनाया। स्टाफ सदस्यों ने डॉक्टरों के योगदान का सम्मान किया और एक विशेष केक काटकर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं, जिसमें मैं और मेरे साथी डॉक्टर भी शामिल थे। ऐसे दिन हमें अपनी चिकित्सा बिरादरी के भीतर एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने और एक-दूसरे के प्रति समर्थन दिखाने का अवसर भी देते हैं। साथ ही, हमने मरीजों के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए।
भविष्य की ओर देखते हुए, मेरा मानना है कि चिकित्सा का क्षेत्र लगातार विकसित होता रहेगा। नई तकनीकें, बेहतर उपचार पद्धतियां और बढ़ी हुई जागरूकता हमें और अधिक प्रभावी ढंग से रोगों से लड़ने में मदद करेंगी। डॉ. अभिषेक द्विवेदी के रूपान मेरा और मंथन हॉस्पिटल का संकल्प है कि हम नवीनतम चिकित्सा प्रगति को अपनाते हुए, मरीजों को सर्वोत्तम संभव देखभाल प्रदान करते रहें। हम प्रयागराज और उसके आसपास के समुदायों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए “स्वस्थ नैनी के संकल्प” के साथ लगातार काम करते रहेंगे।
आपके समर्थन के लिए आभार – मरीज और समुदाय के साथ हमारा संबंध
अंत में, मैं उन सभी लोगों का एक बार फिर से धन्यवाद करना चाहता हूँ जिन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर हमें याद किया और हमें शुभकामनाएँ दीं। आपके समर्थन और विश्वास के बिना, हमारा काम अधूरा है। एक मजबूत डॉक्टर-रोगी संबंध ही एक स्वस्थ समुदाय की नींव है। हम, मंथन हॉस्पिटल में, इस रिश्ते को संजोते हैं और इसे और भी मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। हम आपकी सेवा में हमेशा तत्पर रहेंगे, चाहे वह आपातकाल हो या नियमित परामर्श। याद रखें, आपका स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और हम हर कदम पर आपके साथ हैं।
मंथन हॉस्पिटल – आपका स्वास्थ्य, हमारा समर्पण।
नोट: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी चिकित्सा समस्या के लिए, कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लें। डॉ. अभिषेक द्विवेदी और मंथन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उपचार प्रदान करने के लिए हमेशा उपलब्ध है।


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