अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस: आइए, विज्ञान में महिलाओं को सशक्त बनाने का संकल्प लें! – डॉ. अभिषेक द्विवेदी

आज, 11 फरवरी, अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस है। यह दिन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। महिलाओं से जुड़े इस विशेष दिन पर, मैं, डॉ. अभिषेक द्विवेदी, निदेशक, मंथन अस्पताल, सभी महिला वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं और उन्हें ढेरों शुभकामनाएं देता हूं।

“मेरा मानना है कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ एक आवश्यकता नहीं, बल्कि समाज की समृद्धि और प्रगति के लिए अनिवार्य है। महिलाएं अपनी रचनात्मकता, शोध क्षमता और समर्पण से चिकित्सा जगत में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। इसी उद्देश्य से मैंने मंथन अस्पताल में महिलाओं के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया है, जहां वे अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकें। हमारी टीम में कई महिला चिकित्सक, वैज्ञानिक और शोधकर्ता हैं, जो चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रही हैं। हम न केवल महिला डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, बल्कि छात्राओं को भी विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।” – डॉ. अभिषेक द्विवेदी, निदेशक, मंथन अस्पताल।

विज्ञान में महिलाओं की अहमियत

महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में न केवल संख्या बल बढ़ाती हैं, बल्कि वे नए दृष्टिकोण और रचनात्मकता भी लाती हैं। मैरी क्यूरी, रोजालिंड फ्रैंकलिन, ऐडा लवलेस, कल्पना चावला, डॉ. आशिमा चटर्जी और डॉ. रितु करिधल जैसी महिला वैज्ञानिकों ने दुनिया को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। महिलाओं की अनूठी दृष्टि और रचनात्मकता ने विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम खोले हैं। विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी न केवल नवाचार को बढ़ावा देती है बल्कि समाज के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

भारत में स्थिति

भारत में भी विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं जिनका सामना करना पड़ता है। लैंगिक पूर्वाग्रह, सामाजिक दबाव, और संसाधनों की कमी कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर करने की दिशा में हमें प्रयासरत रहना चाहिए।

मंथन अस्पताल का योगदान

मंथन अस्पताल महिलाओं को विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संस्था में कई महिला वैज्ञानिक और चिकित्सक हैं जो महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। हम छात्राओं के लिए इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके अलावा, हमने हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है जिसके तहत हम ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को विज्ञान के बारे में शिक्षित कर रहे हैं।

लैंगिक समानता और विज्ञान

लैंगिक समानता केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह एक मूल अधिकार है। विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने से न केवल महिलाओं को सशक्त किया जाता है बल्कि समाज का भी विकास होता है। जब महिलाएं विज्ञान में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं, तो वे समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आगे का रास्ता

विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हमें शिक्षा में लैंगिक समानता सुनिश्चित करनी होगी, महिलाओं को अनुसंधान के अवसर प्रदान करने होंगे और समाज में लैंगिक पूर्वाग्रहों को खत्म करना होगा।

आप क्या कर सकते हैं?

  • अपनी बेटियों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • स्कूलों और कॉलेजों में विज्ञान विषयों को लोकप्रिय बनाएं।
  • महिला वैज्ञानिकों के काम को सराहें और प्रचारित करें।
  • सरकार और गैर-सरकारी संगठनों से महिलाओं के लिए विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के अवसर बढ़ाने की मांग करें।
  • सोशल मीडिया पर #WomenInScience हैशटैग का उपयोग करके इस अभियान का समर्थन करें।

आइए, मिलकर विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाएं और एक बेहतर भविष्य का निर्माण करें।


#अंतर्राष्ट्रीयमहिलाएवंबालिकाविज्ञानदिवस #WomenInScience #मंथनअस्पताल #डॉअभिषेकद्विवेदी #लैंगिकसमानता #विज्ञानमेंमहिलाएं